ग्रेटर नोएडा का दिल परी चौक बदहाल: ग्रीन बेल्ट सूखी, अधिकारी बेपरवाह
परी चौक की दुर्दशा पर प्रशासन मौन: सूखी हरियाली, धूल और कूड़े में डूबा शहर का दिल
जिम्मेदार अधिकारी सवालों के घेरे में, ज़मीन पर शून्य काम—कागजों में विकास का खेल?
ग्रेटर नोएडा, संवाददाता:
शहर की पहचान माने जाने वाले परी चौक की हालत बद से बदतर हो चुकी है। परी चौक के आसपास की ग्रीन बेल्ट, पार्क, सेंट्रल वर्ज और गोल चक्कर पूरी तरह उपेक्षा का शिकार हैं। जहां हरियाली होनी चाहिए थी, वहां आज सूखी घास, मुरझाए पेड़-पौधे और बेतरतीब झाड़ियां खड़ी हैं।
स्थिति इतनी खराब है कि कई स्थानों पर ग्रीन बेल्ट के पास कूड़े के ढेर जमा हैं, सड़कों के बीच धूल उड़ रही है और मूर्तियों व आसपास के क्षेत्रों की सफाई तक नहीं हो रही। यह नजारा किसी विकसित शहर का नहीं, बल्कि लापरवाही की चरम सीमा का प्रतीक बन चुका है।
स्थानीय लोगों का सीधा आरोप है कि Greater Noida Industrial Development Authority के उद्यान विभाग के अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से पूरी तरह बेपरवाह हो चुके हैं। OSD गिरीश झा, DGM एस.के. जैन और वरिष्ठ प्रबंधक अजीत भाई पटेल पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर उनके कार्यकाल में शहर का यह हाल क्यों हो रहा है?
बार-बार शिकायतों और मीडिया में मुद्दा उठने के बावजूद भी हालात जस के तस बने हुए हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि या तो निगरानी तंत्र पूरी तरह फेल हो चुका है या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब उद्यान विभाग को हर साल करोड़ों का बजट मिलता है, तो वह खर्च कहां हो रहा है? क्या यह पैसा केवल फाइलों और रिपोर्टों तक ही सीमित रह गया है?
एक्टिव सिटीज़न टीम के सदस्य हरेन्द्र भाटी बताया की जब परी चौक, जिसे ग्रेटर नोएडा का दिल कहा जाता है, आज बदहाल और उपेक्षित दिखाई दे रहा है। यदि शहर के सबसे महत्वपूर्ण केंद्र का यह हाल है, तो बाकी क्षेत्रों की स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है।
स्थानीय नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ग्रीन बेल्ट, पार्क और सड़कों की हालत में सुधार नहीं हुआ, तो वे बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे।
अब देखना यह है कि प्राधिकरण के उच्च अधिकारी इस गंभीर लापरवाही पर कब तक चुप्पी साधे रहते हैं और कब जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होती है।
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