सपनों के लिए संघर्ष: दिल्ली की गलियों से सरकारी नौकरी तक”

Written by: Juhi

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Saurabh

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मेरी संघर्ष की कहानी
साल 2021 में मैं एक सपना लेकर दिल्ली आया था—UPSC की तैयारी करने का सपना। दिल में जुनून था, लेकिन जब एक दिन मैं गया और वहां की कोचिंग की फीस के बारे में पता चला, तो मेरे होश उड़ गए। उस दिन मुझे एहसास हुआ कि सिर्फ सपने देखना काफी नहीं है, उन्हें पूरा करने के लिए हालात से लड़ना भी पड़ता है।

मैंने उसी समय फैसला किया कि पहले एक नौकरी हासिल करूंगा, ताकि अपने पैरों पर खड़ा हो सकूं। इसी सोच के साथ मैंने की तैयारी शुरू कर दी। उस समय मैं में एक छोटे से कमरे में रहता था—इतना छोटा कि उसमें बस सोने भर की जगह थी। गर्मी इतनी होती थी कि हाल बेहाल हो जाता था।
खर्च चलाने के लिए मैं बच्चों को ट्यूशन पढ़ाता था और कभी-कभी एक लाइब्रेरी में काम भी करता था। कई बार तो ऐसा होता था कि दिन में सिर्फ एक वक्त का ही खाना मिल पाता था। रात को जब सब कुछ शांत होता, तो मैं अकेले में रोता था—घर की याद बहुत सताती थी।

मेरी मां ने मेरे सपनों को टूटने नहीं दिया। उन्होंने मेरा साथ देने के लिए एक छोटी सी किराने की दुकान खोली और हर महीने मुझे 5000 रुपये भेजती थीं। लेकिन दिल्ली जैसे शहर में ये रकम बहुत कम थी। फिर भी, किसी तरह मैंने एक साल गुजार लिया।
इसके बाद मैंने एक कोचिंग में एडमिशन लिया। वहां मैं हर टेस्ट में टॉप करने लगा। धीरे-धीरे लोग मुझे एक अच्छे छात्र के रूप में पहचानने लगे। मैंने वहीं छात्रों के डाउट भी सॉल्व करना शुरू कर दिया। मेरी मेहनत को देखकर कोचिंग ने मुझे रहने और खाने की सुविधा दे दी, और मैं वहां एक डाउट फैकल्टी बन गया।

समय बीतता गया और परीक्षा के दिन आए। मैंने तीन साल में तीन प्रयास दिए। हर बार प्रीलिम्स तो क्लियर हो जाता था, लेकिन मेंस में असफलता हाथ लगती थी। हर असफलता मुझे तोड़ती जरूर थी, लेकिन मैं रुका नहीं।

चौथे प्रयास में मैंने खुद से वादा किया—“या तो इस बार सफलता मिलेगी, या फिर मैं ये रास्ता छोड़ दूंगा।” घर की जिम्मेदारियां बढ़ रही थीं, पिता जी कमाते नहीं थे, और अब मेरे पास पीछे हटने का कोई विकल्प नहीं था।
मैंने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। दिन-रात की मेहनत, त्याग और संघर्ष का फल आखिरकार मिला—मैंने पूरा एग्जाम पास कर लिया और मुझे सरकारी नौकरी मिल गई।

आज जब पीछे मुड़कर देखता हूं, तो समझ आता है कि वो छोटे कमरे की घुटन, वो भूख, वो आंसू—सब मेरी ताकत बन गए।
ये कहानी सिर्फ मेरी नहीं है, ये हर उस इंसान की कहानी है जो मुश्किलों के बावजूद अपने सपनों के लिए लड़ता है।

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