रविशंकर प्रसाद का संपूर्ण जीवन परिचय पढ़े नेट इनकम फैमिली बैकग्राउंड पोलिटिकल कैरियर शिक्षा: RAVI SHANKAR PRASAD BIOGRAPHY

Written by: Juhi

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Saurabh

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RAVI SHANKAR PRASAD BIOGRAPHY: 30 अगस्त 1954 को रवि शंकर प्रसाद का जन्म पटना के रहने वाले एक धार्मिक कायस्थ परिवार में हुआ था. इनके पिता का नाम श्री ठाकुर प्रसाद और माता का नाम बिमला प्रसाद था. इनके पिता पटना के उच्च न्यायालय में एक वरिष्ठ अधिवक्ता के तौर पर कार्य कर चुके हैं. भारतीय जनता पार्टी के पूर्व वर्तीभारतीय जनसंघ के प्रमुख संस्थापकों में से एक रह चुके हैं. रवि शंकर प्रसाद की बहन का नाम अनुराधा प्रसाद है वह जो, बी ए जी फिल्म और मीडिया लिमिटेड की मालकिन है. उनकी शादी कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला के साथ हुई है. रवि शंकर प्रसाद की शादी 3 फरवरी 1982 को माया शंकर से हुआ था. उनकी पत्नी पटना विश्वविद्यालय में इतिहास की प्रोफेसर के रूप में कार्य कर चुकी है. रविशंकर प्रसाद हिंदू धर्म से और जाति से कायस्थ परिवार से आते हैं. रविशंकर प्रसाद की कुल संपत्ति. 2024 के आम चुनाव में रविशंकर प्रसाद की तरफ से घोषणा पत्र में बताई गई संपत्ति का बुरा के अनुसार उनके पास 40.60 करोड़ रुपए के कुल संपत्ति है.

रवि शंकर प्रसाद की एजुकेशन क्वालीफिकेशन

पटना विश्वविद्यालय से रविशंकर प्रसाद ने वकालत की पढ़ाई की है. साथ ही पटना विश्वविद्यालय से बीए ऑनर्स किया. उसके बाद राजनीति विज्ञान में एमए किया है. एमए करने के बाद उन्होंने एलएलबी की डिग्री हासिल की है.

रवि शंकर प्रसाद की प्रारंभिक जीवन

रवि शंकर प्रसाद वकील के रूप में भी कार्य कर चुके हैं. रविशंकर प्रसाद 1980 से पटना उच्च न्यायालय में अभ्यास किए थे. उसके बाद 1999 में रविशंकर प्रसाद पटना हाई कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में और 2000 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय में वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में वह कार्य कर चुके हैं. रवि शंकर प्रसाद बिहार में पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टी के महासचिव के रूप में सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने साल 1990 में जन्म भूमि अयोध्या विवाद में हिंदू महासभा की केस लड़ चुके हैं उन्होंने उसे दौरान लालकृष्ण आडवाणी का अदालत में उनको सही साबित करने का प्रयास भी कर चुके हैं साल 1990 में बिहार में उनके रथ यात्रा हो रही थी इस दौरान लालू सरकार ने उनको गिरफ्तार कर दिया था साथ है रविशंकर प्रसाद बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके लाल यादव के द्वारा चारा घोटाले के मामले में उनके विरुद्ध मुख्य वकील के रूप में कार्रवाई भी कर चुके हैं रवि शंकर प्रसाद एक वकील के रूप में लाल यादव पर भारी पड़ गए थे लाल यादव की पार्टी से उनके कई करीबी नेताओं को जेल भी जाना पड़ गया था.

रवि शंकर प्रसाद की राजनीतिक करियर

साल 1970 में रविशंकर प्रसाद राजनीति में कदम रखते हैं. जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में होने वाली आपातकाल वह राजनीति में आंदोलन को बेहद करीब से देखते हैं. उसे दौरान भारतीय जनता पार्टी से कई सारे नेता जुड़े थे और यह छात्र युवा नेता थे उसे समय इंदिरा गांधी के प्रति भारतीय लोगों में आक्रोश जैसे स्थिति थी उन्होंने जनता पर तानाशाही और जैसे शासन चला रही थी इस आंदोलन में रविशंकर प्रसाद भी भाग लेते हैं. साल 1991 से 1995 तक रविशंकर प्रसाद भाजपा की युवा शाखा भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में कार्य कर चुके हैं. उसके बाद 1995 में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारी समिति के सदस्य के रूप में भी कार्य किए हैं.

साल 2000 में अटल बिहारी वाजपेई भारत के प्रधानमंत्री रहते हुए उनके कार्यकाल में वह राज्यसभा के लिए चुने जाते हैं. और उनको सरकार में पहली बार राज्य मंत्री बनाया जाता है. बिहार सरकार में रविशंकर प्रसाद को 2001 में कोयला राज्य मंत्री बनाया जाता है. रविशंकर प्रसाद इस पद पर 2003 तक सेवाएं देते हैं. 2003 में रविशंकर प्रसाद को सूचना और प्रसारण मंत्री बनाया जाता है. रविशंकर प्रसाद रेडियो टेलीविजन सहित एनीमेशन के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन लाते हैं. साल 2007 में बीजेपी पार्टी उनका मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में नियुक्ति प्रदान करती है. उससे पहले मार्च 2006 में रविशंकर प्रसाद राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में कार्य किए थे.

रविशंकर प्रसाद को अप्रैल 2006 और अप्रैल 2012 में रविशंकर प्रसाद का चुनाव राज्यसभा सदस्य के लिए होता है. साल 2014 में जब मोदी गवर्नमेंट के पहले कार्यकाल में रविशंकर प्रसाद को कानून और न्याय मंत्री तथा संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री बनाया जाता है. रविशंकर प्रसाद देश के दूसरे सबसे लंबे समय तक कानून मंत्री के पद पर कार्य करने वाले नेता हैं. इसके साथ ही वह संचार और आईटी मिनिस्टर के रूप में भी कार्य कर चुके हैं. 2019 में भाजपा रविशंकर प्रसाद को शत्रुघ्न सिन्हा के खिलाफ लड़ने के लिए मैदान में उतरते है और पटना साहिब सीट से रविशंकर प्रसाद को बहुमत हासिल भी होता है. शत्रुघ्न सिन्हा के भारी वोटो के अंतर से हार गए थे.

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