NITISH KUMAR BIOGRAPHY: नीतीश कुमार का जन्म 1 मार्च 1951 को बिहार के बख्तियार में पिता कविराज राम लखन सिंह और माता परमेश्वरी देवी के घर हुआ था. नीतीश कुमार की शादी मंजू सिंहा से हुआ. उनकी पत्नी का निधन 2007 में हो गया था. नीतीश कुमार और मंजू सिंह का एक पुत्र है. नीतीश कुमार और उनकी पत्नी मंजू सिंहा का रिश्ता बहुत खास था. मंजू सिंह ने नीतीश कुमार के हर एक उतार-चढ़ाव में उनके साथ दी है.
नीतीश कुमार अपनी पत्नी से बेहद प्रेम करते थे. नीतीश कुमार बिहार कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग पटना (NIT) इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट हैं. वह नौकरी करने के इच्छुक नहीं थे. उनका राजनीतिक और सामाजिक कार्य में मन लगता था. वही बात करें नीतीश कुमार की धन दौलत तो उनके पास केवल 21000 रुपए का कैश है. कुल संपत्ति 1 करोड़ 69 लाख 97 हजार 741 रुपए है. जिसमें 1 करोड़ 48 लाख रुपए का फ्लैट दिल्ली में है. नितेश के पास 12 गाय और नौ बछड़े हैं. नीतीश कुमार बिहार में नौवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लिए हैं.
नीतीश कुमार का राजनीतिक जीवन
1970 में जब जयप्रकाश नारायण के संरक्षण में संपूर्ण क्रांति आंदोलन किया जा रहा था. उस वक्त वह इस क्रांति का भी हिस्सा बने थे. लोकनायक जयप्रकाश नारायण के राजनीतिक विचारधारा से नीतीश कुमार काफी प्रेरित भी हुए थे. उनका राजनीतिक जीवन जनता पार्टी के संग जुड़ने से शुरू हुआ था 1990 में बिहार की राजनीति से उनका परिचय होता है. 1985 से लेकर 1995 तक विधायक के पद पर रहने का मौका मिलता है. 1989 में उन्होंने (BAHR) संसदीय सीट से चुनाव लड़े और पहली बार संसद पहुंचे थे. 1999 1996 1998 और 1999 तक वह लगातार लोकसभा के सदस्य रहते हैं.
साल 2004 में बरह और नालंदा दो सीटों से वह चुनाव लड़ते हैं. नालंदा सीट पर उनको जीत हासिल होती है. बरह सीट से उनकाे हार मिलती है. साल 2006 में नीतीश कुमार को विधान परिषद के लिए निर्वाचित किया जाता है. नीतीश कुमार 3 से 10 मार्च 2000- 24 नवंबर 2005 से 20 मई 2014 और 22 फरवरी 2015 अभी तक बिहार के मुख्यमंत्री पद पर कार्यरत है. 28 जनवरी 2024 को मुख्यमंत्री के पद के लिए 9वीं बार नीतीश कुमार शपथ लेते हैं. 1989 और 1999 2001 से 2004 तक नीतीश कुमार कृषि सतह परिवहन आदि पदों पर कार्य करते हैं. बता दें आपको नीतीश कुमार जॉर्ज फर्नांडीज के समता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक है.
नीतीश कुमार का राजनीतिक जीवन बिना किसी दाग अशांति के बगैर व्यवस्थित संगठनात्मक प्रशासनिक अनुशासित तरीके से हुआ है. अटल बिहारी वाजपेई जी के सरकार में नीतीश कुमार को दो बार रेल मंत्रालय में सेवा करने का अवसर मिला था. रेल मंत्री रहते हुए उन्होंने शताब्दी एक्सप्रेस को चलाएं इससे आम यात्रियों को सस्ते कीमत पर रेल से यात्रा करने की सुविधा प्राप्त हुई. उनके शासन के दौरान उन्होंने हाजीपुर में ईस्ट सेंट्रल रेलवे जोन की स्थापना कराई है. 1999 में गैसाल रेल दुर्घटना हुई. उस दुर्घटना में सैकड़ो यात्रियों की जान चली गई थी. नीतीश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा भी दे दिया था.
नीतीश कुमार साल 2000 में पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते हैं. पूर्ण बहुमत प्राप्त नहीं होने के कारण 7 दिनों के अंदर उनको मुख्यमंत्री का पद भी छोड़ना पड़ा था. नीतीश कुमार के उथल-पुथल राजनीति जीवन में बहुत बड़ा बदलाव 2005 में आया. जब वह लालू प्रसाद यादव के जंगल राज पार्टी की छवि को तोड़ते हुए भाजपा के साथ गठबंधन में शामिल होते हैं. पूर्ण बहुमत प्राप्त करके मुख्यमंत्री पद जीतते हैं. लाल यादव के शासनकाल को जंगल राज कहा जाता है. नीतीश कुमार के शासनकाल को सुशासन बाबू का राज कहा जाता है. नीतीश कुमार ने वादा किया था कि अगर वह मुख्यमंत्री बनते हैं तो बिहार में सड़क बिजली पानी मूलभूत सुविधाओं की जरूरतों की पूर्ति करेंगे.
2007 में मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना की शुरुआत करते हैं. महिला आरक्षण ग्राम पंचायत स्तर पर महिलाओं की भागीदारी मुख्यमंत्री बालिका प्रोत्साहन योजना जैसी सामाजिक बदलाव महिलाओं के जीवन में लाने के लिए उन्होंने कई ऐसी योजनाएं चलाई जिससे महिलाएं सीधे रूप से लाभान्वित हुई है. मुख्यमंत्री की तरफ से जल जीवन हरियाली और गंगा जलापूर्ति परियोजना शुरू की गई. इस योजना से बिहार के सूखाग्रस्त दक्षिणी इलाकों में गंगा का पानी पहुंचाया गया. उसके बाद कृषि सड़क शिक्षा स्वास्थ्य के क्षेत्र में बदलाव का प्रयास. 2016 में पूर्ण शराब बंदी नीति लाया गया. इससे अवैध शराब कारोबार जहरीले शराबों से होने वाले मौत को बढ़ावा पर पाबंदी लगानी थी. नीतीश कुमार भाजपा कांग्रेस आरजेडी तीनों के साथ मिलकर राजनीति कर चुके हैं.
तीनों को भी छोड़ चुके हैं. 2013 में नरेंद्र मोदी को एनडीए का प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनाया गया नीतीश कुमार को यह पसंद नहीं आया. भाजपा के साथ 17 साल पुराना गठबंधन उन्होंने तोड़ दिया. फिर 2015 में नीतीश कुमार लालू प्रसाद और कांग्रेस के साथ मिलकर महागठबंधन का रिश्ता जोड़ते हैं.भाजपा को हराते भी है. 2017 में आरजेडी के नेता तेजस्वी यादव पर भ्रष्टाचार का आरोप लगता है. तो वह आरजेडी से अपना रिश्ता तोड़कर फिर से भाजपा के साथ रिश्ता जोड़ लेते हैं. 2022 में भाजपा से फिर अपना रिश्ता तोड़ते हैं. 2024 में फिर भाजपा में शामिल हो जाते हैं. नीतीश कुमार हकीकत में ही बड़े ही दलबदलू किस्म के नेता है.