अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पत्नी मलानिया ट्रंप ने पुतिन को दी चिट्ठी,पढ़े पूरा मामला क्या है? MELANIA TRUMP WROTE A LETTER TO PUTIN

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने अमेरिका के अलास्का में शुक्रवार को यूक्रेन वार को लेकर खास बैठक किए थे.  इस खास बैठक में  मलानिया ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन के लिए एक खास चिट्ठी भिजवाई थी.

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अब हर कोई यह जानना चाहता है, कि आखिरकार उस चिट्ठी में क्या खास लिखा था. डोनाल्ड  ट्रंप ने इस चिट्ठी को खुद रूसी राष्ट्रपति पुतिन को सौंप दिए थे. आपको इस आर्टिकल में पढ़ने को मिलेगा कि आखिरकार अमेरिकी प्रथम महिला ने रूसी राष्ट्रपति को क्या संदेश देना चाहती थी. इस माध्यम से अमेरिका के अलास्का में दोनों देश के प्रतिनिधियों ने असामान्य कूटनीति पर बातचीत किए. इसके साथ ही यूक्रेन युद्ध की समाप्ति पर भी चर्चा हुई.

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चिट्ठी में क्या संदेश था?

बता दें की रूस और यूक्रेन युद्ध में बच्चों को कथित रूप से यूक्रेन से निकलकर रूस और  रूसी एरिया में भेजा गया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पुतिन के इस मीटिंग में अपहरण किए गए बच्चों का मुद्दा उठाया गया समाचार एजेंसी रायटर्स ने बताया है. अमेरिका की पहली महिला मलानिया ट्रंप ने अपने पत्र में फरवरी 2022 में अनाथ बच्चों  के  बड़े पैमाने पर  अपहरण होते हैं.

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रूसी अधिकारियों के द्वारा यूक्रेन से बच्चों को अपहरण करने को लेकर और उनके ऊपर हुए जुल्म के खिलाफ ध्यान आकर्षित करने का प्रयास की है. यूक्रेन ने रूस पर बच्चे अपहरण करने के गंभीर आरोप लगाए हैं. क्योंकि अनुमान मुताबिक बड़े पैमाने पर 20,000 से अधिक  बच्चों को यूक्रेन भेजा गया है. संयुक्त  राष्ट्र  सम्मेलनों के मुताबिक इस हरकत को नरसंहार घोषित किया जाना चाहिए. यूक्रेन के अधिकारियों ने यह बताया है कि बच्चों को रूस में भेजा गया है वह भी उनके माता-पिता के सहमति पर.

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यूक्रेन ने रूस पर लगाए बच्चे अपहरण के गंभीर आरोप

यूक्रेन का मानना है कि रूस ने यूक्रेनी बच्चों को अपहरण कर और उन पर जुल्म करके चोरी छिपे अपने कब्जे में लिया है.  इन बच्चों को रूस के क्षेत्र में रखा गया है. 2022 में रूस के पूर्ण पैमाने पर हमले की शुरुआत के बाद लाखों यूक्रेनी बच्चों को गंभीर पीड़ा को झेलना पड़ा.    

उन्हें जबरन विस्थापन जैसे समस्याओं से जूझना भी पड़ा है. साथ ही दोनों देशों का काफी नुकसान भी हुआ है. वही रूस ने साफ कर दिया है कि वह इन बच्चों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि  कीव और पश्चिमी देश इस गतिविधि को एक अपराध के तौर पर देखते हैं.

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