EKNATH SHINDE BIOGRAPHY: 9 फरवरी 1964 को एकनाथ शिंदे का जन्म महाराष्ट्र के सातारा जिला में हुआ था. इनके पिता का नाम संभाजी नायडू शिंदे है. इनकी माता का नाम श्रीमती लता शिंदे है. एकनाथ शिंदे के पुत्र का नाम श्रीकांत शिंदे है वह ऑर्थोपेडिक सर्जन है.
श्रीकांत शिंदे साल 2014 से 2019 के लोकसभा में महाराष्ट्र के कल्याण लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े थे जहां उनका जीत हासिल हुई थी. और वह लंबे समय तक इस क्षेत्र का प्रतिनिधि के रूप में कार्य करते रहे हैं. श्रीकांत शिंदे महाराष्ट्र के कल्याण लोकसभा क्षेत्र में संसद के रूप में भी कार्य कर चुके हैं.
एकनाथ शिंदे की शिक्षा
एकनाथ शिंदे की शुरुआती पढ़ाई साल 1981 में मंगला हाई स्कूल से दसवीं की पढ़ाई की है. उसके बाद ठाणे के न्यू मंगला हाई स्कूल से 11वीं की पढ़ाई करते हैं. बीच में कि कुछ कारणों से उनको अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ती है. वह बेहद कम उम्र से राजनीति में सक्रिय हो गए थे. साल 2014 में महाराष्ट्र के मंत्री बने उसके बाद उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन की डिग्री यशवंतराव चव्हान मुक्त विश्वविद्यालय से मराठी और राजनीति शास्त्र में बीए पूर्ण करते हैं. उनके द्वारा चुनाव के समय दी गई जानकारी के अनुसार ग्रेजुएशन की डिग्री कंप्लीट नहीं किए हैं. यह जानकारी उनके द्वारा बताई गई जानकारी के अनुसार दी गई है.
एकनाथ शिंदे की राजनीतिक सफर
यह बात आपको जानकर बहुत हैरानी होगी कि एकनाथ शिंदे ऑटो चलाने का काम कर चुके हैं. स्कूली पढ़ाई के दौरान एकनाथ शिंदे महाराष्ट्र के वागले स्टेट इलाके में ऑटो चलाने का काम करते थे. इस दौरान उनकी मुलाकात शिवसेना के नेता आनंद दिघे से होती है. उस वक्त एकनाथ शिंदे की उम्र 18 वर्ष थी. कम उम्र में ही एकनाथ शिंदे शिवसेना पार्टी में सम्मिलित हो जाते हैं
एक शिव सैनिक कार्यकर्ता के रूप में वह राजनीति में सक्रिय हो जाते हैं. एकनाथ शिंदे आनंद दिघे के मार्गदर्शन में पूर्ण रूप से राजनीति के गुण सीखना शुरू करते हैं.
आनंद दिघे ने एकनाथ शिंदे को ठाणे में होने वाले तात्कालिक नगर निगम चुनाव में पार्षद के रूप में उनका चुनाव लड़ने का टिकट देते हैं. एकनाथ शिंदे अपने पहले ही चुनावी प्रयास में विजय रहते हैं. वह विपक्ष नेता के रूप में नगर निगम चुनाव में कार्य करते हैं. एकनाथ शिंदे 2002 में दोबारा नगर निगम पार्षद का चुनाव लड़ते हैं. उनको इस बार भी विजई हासिल होती है. 2001 में आनंद दिघे की मृत्यु हो जाती है. राजनीतिक रूप से एकनाथ शिंदे अकेले पड़ जाते हैं. लेकिन आनंद दिघे के द्वारा बताई गई हर एक रणनीति एकनाथ शिंदे अपने क्षेत्र को संभालने में लगा देते हैं. और उस क्षेत्र के सबसे प्रभावी नेता के रूप में उनकी छवि बन जाती है. उस समय शिवसेना पार्टी में बालासाहेब ठाकरे प्रमुख नेता थे. उन्हीं का फैसला अंतिम फैसला होता था. 2005 में पार्टी से नारायण राणे और आनंद राणे शिवसेना पार्टी छोड़ देते हैं.
उसके बाद एकनाथ शिंदे का स्थान और बढ़ जाता है. एकनाथ शिंदे राजनीति में श्री बालासाहेब ठाकरे के करीबी बनते गए. बालासाहेब ठाकरे के परिवार में राजनीतिक विवाद समय के साथ और बढ़ता गया. उनके भतीजे राज ठाकरे ने शिवसेना से दूरियां बना ली. उनका शिवसेना पार्टी से दूर जाना एकनाथ शिंदे के लिए रास्ता आसान बना देता है. एकनाथ शिंदे बालासाहेब ठाकरे उनके बेटे उद्धव ठाकरे के बेहद करीबी रिश्ते बन जाते हैं. और उनका पहचान राष्ट्रीय स्तर पर होने लगता है. एकनाथ शिंदे लगातार साल 2009 2014 फिर 2019 में ठाणे जिले के कोपरी सीट महाराष्ट्र से वह नेता के रूप में कार्य करते रहे. 2019 में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सरकार में एकनाथ शिंदे लोक निर्माण मंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं.
2018 में एकनाथ शिंदे शिवसेना पार्टी के नेता नियुक्त आधिकारिक रूप से हुए थे. राजनीति में गठबंधन की सरकारी बंटी और बिगड़ी रहती हैं ऐसा ही 2019 में उद्धव ठाकरे 25 साल के बाद अपना गठबंधन बीजेपी पार्टी से तोड़ देते हैं. और एनसीपी कांग्रेस के साथ मिलकर शिवसेना का एक गठबंधन बनाया जाता है. इसका उन्होंने नाम दिया महा विकास अघाड़ी देते हैं. उद्धव ठाकरे 2019 में एनसीपी कांग्रेस के नेतृत्व में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते हैं वही एकनाथ शिंदे को यह राजनीतिक समीकरण बिल्कुल पसंद नहीं आया और
वह 20 जून 2022 को तात्कालिक मुख्यमंत्री बाला साहब के नेतृत्व में बना शिवसेना पार्टी के लिए बगावत कर देते हैं वह एनसीपी और कांग्रेस और गठबंधन सरकार से और शिवसेना पार्टी से भी अलग हो जाते हैं उन्होंने सफाई दिया था कि शिवसेना पार्टी सिर्फ बालासाहेब वाली शिवसेना की पार्टी रहेगी.
एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री के रूप में
एकनाथ शिंदे 30 जून 2022 को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के पद की शपथ लेते हैं. साथ ही उन्होंने चुनाव आयोग से असली शिवसेना पार्टी का राष्ट्रीय चुनाव चिन्ह तीर कमान दिए जाने की मांग कर दी. चुनाव आयोग ने 2023 में उनके इस मांग को सहित ठहराया और पार्टी को वापस चुनाव चिन्ह तीर कमान उन्हें दे दिया गया.
21 फरवरी 2023 को शिवसेना पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की एक बैठक होती है. जिसमें मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को शिवसेना पार्टी का अध्यक्ष चुना गया था. 2024 मेंएकनाथ शिंदे के द्वारा जारी चुनावी हलफनामे के अनुसार उनके पास 14.83 करोड़ रुपए की कुल संपत्ति है. 2019 में एकनाथ शिंदे की कुल संपत्ति 5.44 करोड़ रुपए थी.